Financial Accounting

वित्तीय लेखों की कमियाँ | Limitations of Financial Accounting

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वित्तीय लेखों की कमियों का अध्ययन करने से पूर्व वित्तीय लेखों का अर्थ समझना आवश्यक है। साधारणतया वित्तीय लेखों का आशय उस लेखा पद्धति से है जिसमें व्यापार से सम्बन्धित सभी वित्तीय व्यवहारों का लेखा इस प्रकार किया जाता है जिससे उस संस्था का लाभ या हानि (profit or loss) तथा वित्तीय स्थिति (financial position) का पता लगाया जा सके। इस पद्धति के अन्तर्गत व्यवहारों को उक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिये लिखा जाता है।

वित्तीय लेखों की कमियाँ

वित्तीय लेखों में उन व्यवहारों का लेखा ही किया जाता है जो कि व्यापार की स्थिति से सम्बन्धित होते हैं तथा जिनके द्वारा व्यापार का लाभ-हानि ज्ञान होता है। इन लेखों में निर्माण के सम्बन्ध में होने वाले व्ययों का कोई विश्लेषणात्मक लेखा नहीं किया जाता है। निर्माता को वित्तीय लेखों से निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों का ज्ञान नहीं हो पाता है :

वस्तु की लागत के ज्ञान का अभाव -वित्तीय लेखों के द्वारा किसी वस्तु की लागत ज्ञात नहीं की जा
सकती है, फलस्वरूप निर्माता विक्रय मूल्य भी ठीक प्रकार से निश्चित नहीं कर सकता है।

उत्पादन की लागत का विभिन्न क्रियाओं में वर्गीकरण का अभाव: -वित्तीय लेखों से केवल किसी मद पर होने बाले कुल खर्चे का पता लगाया जा सकता है। लेकिन इससे यह पता नहीं लग सकता कि किसी वस्तु, कार्य या क्रिया पर कितना व्यय उस मद के सम्बन्ध में हो रहा है।

उदाहरण के लिये यदि कपड़ा निर्माण करने वाली संस्था के क्रय खाते से यह ज्ञात होता है कि गत वर्ष में 5,000 रु का सूत कपड़ा निर्माण करने के लिये प्रयोग किया गया तो इससे यह पता नहीं लग सकता कि सूटिंग, शर्टिंग तथा साड़ी आदि के निर्माण पर कितना खर्च सूत के लिये किया गया है।

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